डा.भीमराव अंबेदकर दलितों के मसीहा, महान चिंतक, न्यायवादी व अर्थ शास्त्री थे-डा. सीमांत गर्ग

*भाजपा के   पूर्व जिलाध्यक्ष  डा.सीमांत गर्ग के नेतृत्व में पुरानी दाना मंडी स्थित दफ्तर में डा.भीमराव अंबेदकर का जन्मदिन मनाया
मोगा, 14 अप्रैल ( जशन ) :  भारतीय संविधान के निर्माता व भारत रतन डा.भीमराव अंबेदकर ने हमेशा अपना पूरा जीवन दलितों व पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष में व्यतीत किया। डा.भीमराव अंबेदकर ने हमेशा मजदूर वर्ग व महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया। डा. भीमराव अंबेदकर दलितों के मसीहा, महान चिंतक, समाज सुधारक, न्यायवादी व प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री भी थे, जिनको रहती दुनियां तक याद किया जाता रहेगा। उक्त विचार भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा.सीमांत गर्ग ने आज पुरानी दाना मंडी स्थित भाजपा के दफ्तर में  डा.भीमराव अंबेदकर के चित्र पर  फूल मालाएं 135 वें प्रकट दिवस पर भाजपा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रकट किए। इससे पहले पूर्व जिलाध्यक्ष डा.सीमांत गर्ग ने अपने भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैसाखी के शुभ पर्व पर श्री गुरुद्वारा साहिब में जाकर मात्था टेका तथा आशीर्वाद लिया।  इस अवसर पर भाजपा के उपाध्यक्ष विक्की सितारा, मंडल अध्यक्ष भूपिंदर हैप्पी, मंडल अध्यक्ष उमाकांत राय, प्रवासी मंच के विजय मिश्रा, कमल घारू, आई.टी.सेल के मुकेश शर्मा, तरसेम जंड, धर्मवीर भारती, आशीष सिंगला, नरेन्द्रपाल सिंह सेठी, जतिंदर चड्ढा, महिला मोर्चा की सीनियर नेता नीतू गुप्ता, संजीव अग्रवाल, संजीव मंगला, सचिन गर्ग, रंजीत सिंह, नरेन्द्र सेठी, गोल्डी कौर के अलावा काफी संख्या में भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।  डा.सीमांत गर्ग ने कहा कि डा.भीमराव अंबेदकर का जन्म एक दलित परिवार में हुआ तथा डा.अंबेदकर द्वारा अपने जीवन में किए गए कार्यों व उनके दिखाए गए रास्तों पर चलकर हम समाज में पिछड़े वर्ग के लोगों की भलाई के लिए कार्य करके तथा उनको सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डा.भीमराव अंबेदकर ने कहा था कि धर्म मनुष्य के लिए हैं, न कि मनुष्य धर्म के लिए तथा मैं ऐसे धर्म को मानता है जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता हो। उन्होंने कहा कि डा.भीमराव अंबेदकर सामाजिक न्याय के लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद आर्थिक व राजनीतिक मुद्धों को हल करने के पक्ष में थे। उन्होंने पिछड़े लोगों की शिक्षा को अधिक से अधिक देने के प्रयास किए, ताकि पिछड़े वर्ग के लोग भी पढ़-लिखकर आगे अ सके।  उन्होंने कहा कि किसी देश व समाज की तरक्की, पिछड़े लोगों की शिक्षा व उनको मिले बराबर के अधिकारों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि हमें डा.भीमराव अंबेदकर के दिखाए मार्ग पर चलते हुए हमेशा समाज में सभी धर्मों, जातियों को बराबर के अधिकार देकर उनका मान सम्मान करना चाहिए। उन्होंने समाज में भेदभाव व छुआछूत को किसी भी तरह पनपने न देने की भी वकालत की थीं। आज उनके प्रकट दिवस पर उनके चित्र पर नत्मस्तक होकर उन्हें फूल मालाएं अर्पित करके उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।